Srinivasa ramanujan in hindi. S.R. Srinivasa Varadhan 2019-02-10

Srinivasa ramanujan in hindi Rating: 5,8/10 1321 reviews

श्रीनिवास रामानुजन की जीवनी। Srinivasa Ramanujan Biography in Hindi

srinivasa ramanujan in hindi

The professor of civil engineering at the Madras Engineering College C L T Griffith was also interested in Ramanujan's abilities and, having been educated at University College London, knew the professor of mathematics there, namely M J M Hill. According to , Ramanujan used to jot down his ideas in notebooks, in green ink. About 17% of the population speak English as a second language. The East India Company encouraged the weavers and merchants to settle north of the fort. उसने रामानुजन के उन पन्नो को इंग्लैंड के महान गणितज्ञ प्रोफ़ेसर जी.


Next

S.R. Srinivasa Varadhan

srinivasa ramanujan in hindi

Weavers also lived in the Chintadripet area to the southwest of the fort and beyond the island in the Cooum River. हार्डी को 120 प्रमेय शोध कार्य से संबधित पत्र के साथ भेजी जीएच. In related work, Varadhan and American mathematician Daniel Stroock studied processes and obtained important results in population. Once Ramanujan's journey to England was arranged the coterie of his admiring friends started preparing him for the trip. By 1911 Ramanujan had returned to Madras.

Next

गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन् की जीवनी

srinivasa ramanujan in hindi

Royapuram to the north of the fort beyond Black Town George Town became an area of Christian settlement. Ramanujan for example looked for the limits of infinite series. The Mathematical Style of Ramanujan Ramanujan's style of doing mathematics developed from his introduction to higher mathematics through trigonometry and Carr's volume of six thousand theorems. A letter was written that contained a selection of about one hundred theorems which Ramanujan had discovered. There were other villages such as Mylapore in the area which were temple towns. However his health was very poor and, despite medical treatment, he died there the following year. King Harald V of Norway congratulating S.


Next

Srinivasa Ramanujan: Latest News, Photos, Videos on Srinivasa Ramanujan

srinivasa ramanujan in hindi

San José State University applet-magic. He passed in mathematics but failed all his other subjects and therefore failed the examination. He is a young man of quite exceptional capacity in mathematics and especially in work relating to numbers. It was in the district in Madras near the beach known as Triplicane. Srinivasan, a renowned math teacher. Night and day I do my calculations on slate.

Next

10 Things to Know about Srinivasa Ramanujan, the Genius Who Continues to Amaze the World

srinivasa ramanujan in hindi

By the end of November 1918 Ramanujan's health had greatly improved. Near the end of 1918 he became a Fellow of Trinity College of the University of Cambridge. जन्म: 22 दिसम्बर 1887 मृत्यु: 26 अप्रैल 1920 कार्यक्षेत्र: गणित उपलब्धियां: लैंडॉ-रामानुजन् स्थिरांक, रामानुजन्-सोल्डनर स्थिरांक, रामानुजन् थीटा फलन, रॉजर्स-रामानुजन् तत्समक, रामानुजन् अभाज्य, कृत्रिम थीटा फलन, रामानुजन् योग दुनिया में कभी-कभी ऐसी विलक्षण प्रतिभाएं जन्म लेती हैं जिनके बारे में जानकार सभी आश्चर्य चकित रह जाते हैं। महान गणितग्य श्रीनिवास अयंगर रामानुजन एक ऐसी ही भारतीय प्रतिभा का नाम है जिनपर न केवल भारत को परन्तु पूरे विश्व को गर्व है। महज 33 वर्ष की उम्र में शायद ही किसी वैज्ञानिक और गणितग्य ने इतना कुछ किया हो जितना रामानुजन ने किया। यह आश्चर्य की ही बात है कि किसी भी तरह की औपचारिक शिक्षा न लेने के बावजूद उन्होंने उच्च गणित के क्षेत्र में ऐसी विलक्षण खोजें कीं जिससे इस क्षेत्र में उनका नाम हमेशा के लिए अमर हो गया। ये न केवल भारत बल्कि समूचे विश्व का दुर्भाग्य था कि गणित का ये साधक मात्र तैंतीस वर्ष की आयु में तपेदिक के कारण परलोक सिधार गया। रामानुजन बचपन से ही विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। आपको ये जानकार हैरानी होगी कि इन्होंने स्वयं गणित सीखा और अपने चिर जीवनकाल में गणित के 3,884 प्रमेयों का संकलन किया। उनके द्वारा दिए गए अधिकांश प्रमेय गणितज्ञों द्वारा सही सिद्ध किये जा चुके हैं। उन्होंने अपने प्रतिभा के बल पर बहुत से गणित के क्षेत्र में बहुत से मौलिक और अपारम्परिक परिणाम निकाले जिनपर आज भी शोध हो रहा है। हाल ही में रामानुजन के गणित सूत्रों को क्रिस्टल-विज्ञान में प्रयुक्त किया गया। इनके कार्य से प्रभावित गणित के क्षेत्रों में हो रहे काम के लिये और इस महान गणितग्य को सम्मानित करने के लिए रामानुजन जर्नल की स्थापना भी की गई है। प्रारंभिक जीवन श्रीनिवास अयंगर रामानुजन का जन्म 22 दिसम्बर 1887 को तमिल नाडु के कोयंबटूर के ईरोड नामक गांव में एक पारंपरिक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम श्रीनिवास अय्यंगर और माता का नाम कोमलताम्मल था। जब बालक रामानुजन एक वर्ष के थे तभी उनका परिवार कुंभकोणम में आकर बस गया था। इनके पिता एक स्थानिय व्यापारी के पास मुनीम का कार्य करते थे। शुरू में बालक रामानुजन का बौद्धिक विकास दूसरे सामान्य बालकों जैसा नहीं था और वह तीन वर्ष की आयु तक बोलना भी नहीं सीख पाए थे, जिससे उनके माता-पिता को चिंता होने लगी। जब बालक रामानुजन पाँच वर्ष के थे तब उनका दाखिला कुंभकोणम के प्राथमिक विद्यालय में करा दिया गया। पारंपरिक शिक्षा में रामानुजन का मन कभी भी नहीं लगा और वो ज्यादातर समय गणित की पढाई में ही बिताते थे। आगे चलकर उन्होंने दस वर्ष की आयु में प्राइमरी परीक्षा में पूरे जिले में सर्वोच्च अंक प्राप्त किया और आगे की शिक्षा के लिए टाउन हाईस्कूल गए। रामानुजन बड़े ही सौम्य और मधुर व्यवहार के व्यक्ति थे। वह इतने सौम्य थे कि कोई इनसे नाराज हो ही नहीं सकता था। धीरे-धीरे इनकी प्रतिभा ने विद्यार्थियों और शिक्षकों पर अपना छाप छोड़ना शुरू कर दिया। वह गणित में इतने मेधावी थे कि स्कूल के समय में ही कॉलेज स्तर का गणित पढ़ लिया था। हाईस्कूल की परीक्षा में इन्हें गणित और अंग्रेजी मे अच्छे अंक लाने के कारण छात्रवृत्ति मिली जिससे कॉलेज की शिक्षा का रास्ता आसान हो गया। उनके अत्यधिक गणित प्रेम ने ही उनकी शिक्षा में बाधा डाला। दरअसल, उनका गणित-प्रेम इतना बढ़ गया था कि उन्होंने दूसरे विषयों को पढना छोड़ दिया। दूसरे विषयों की कक्षाओं में भी वह गणित पढ़ते थे और प्रश्नों को हल किया करते थे। इसका परिणाम यह हुआ कि कक्षा 11वीं की परीक्षा में वे गणित को छोड़ बाकी सभी विषयों में अनुत्तीर्ण हो गए जिसके कारण उनको मिलने वाली छात्रवृत्ति बंद हो गई। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही ठीक नहीं थी और छात्रवृत्ति बंद होने के कारण कठिनाईयां और बढ़ गयीं। यह दौर उनके लिए मुश्किलों भरा था। घर की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए रामानुजन ने गणित के ट्यूशन और कुछ एकाउंट्स का काम किया। वर्ष 1907 में उन्होंने बारहवीं कक्षा की प्राइवेट परीक्षा दी लेकिन इस बार भी वह अनुत्तीर्ण हो गए। इस असफलता के साथ उनकी पारंपरिक शिक्षा भी समाप्त हो गई। संघर्ष का समय बारहवीं कक्षा की प्राइवेट परीक्षा में अनुत्तीर्ण होने के बाद के कुछ वर्ष उनके लिए बहुत हताशा और गरीबी भरे थे। इस दौरान रामानुजन के पास न कोई नौकरी थी और न ही किसी संस्थान अथवा प्रोफेसर के साथ काम करने का अवसर। इन विपरीत परिस्थितियों में भी रामानुजन ने गणित से सम्बंधित अपना शोध जारी रखा। गणित के ट्यूशन से महीने में कुल पांच रूपये मिलते थे और इसी में गुजारा करना पड़ता था। यह समय उनके लिए बहुत कष्ट और दुःख से भरा था। उन्हें अपने भरण-पोषण और गणित की शिक्षा को जारी रखने के लिए इधर उधर भटकना पड़ा और लोगों से सहायता की मिन्नतें भी करनी पड़ी। इधर रामानुजन बेरोजगारी और गरीबी से जूझ ही रहे थे कि उनकी माता ने इनका विवाह जानकी नामक कन्या से कर दिया। आर्थिक तंगी और पत्नी की बढ़ी जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए वे नौकरी की तलाश में मद्रास चले गए। चूँकि उन्होंने बारहवीं की परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की थी इसलिए इन्हें नौकरी नहीं मिल पा रही थी और इसी बीच उनका स्वास्थ्य भी बुरी तरह खराब हो गया जिसके कारण वापस कुंभकोणम लौटना पड़ा। स्वास्थ्य ठीक होने के बाद वे दोबारा मद्रास गए और कुछ संघर्षों के बाद वहां के डिप्टी कलेक्टर श्री वी. This convinced her that it was alright for her son to travel to England. They never had children and it is possible that the marriage was never consummated. The region was for a long period of time known as Madras State.


Next

Srinivasa Ramanujan

srinivasa ramanujan in hindi

Ramanujan left Madras in March of 1914. The book contained theorems, formulae and short proofs. I am already a half starving man. ऐसे महान गणितज्ञ पर हम सब भारतीयों को गर्व होना चाहिए. During that time he seems to have found time to work on mathematics because a few sheets of this work accidently got sent to the Port Trust supervisor's office along with some official papers.

Next

Srinivasa Ramanujan Biography in Hindi । श्रीनिवास रामानुजन की जीवनी

srinivasa ramanujan in hindi

Ramanujan was born in his grandmother's house in Erode, a small village about 400 km southwest of Madras. For examples of the evaluation of infinite series and continued fractions see. Without money he was soon in difficulties and, without telling his parents, he ran away to the town of Vizagapatnam about 650 km north of Madras. It was also recognized that although many autistic people are of very limited functionality that can be characterized as retarded there are some who are of normal or even above normal abilities. According to Ranjith, the team representative, the participants were being apprised about Ramanujan and his passion for Math, and taken on visits to his home and school in Kumbakonam, and leading Math institutes.

Next

Srinivasa Ramanujan, a Mathematician Brilliant Beyond Comparison

srinivasa ramanujan in hindi

Ranganathan's book Ramanujan: The Man and the Mathematician there is no mention of the story that Ramanujan operated two adding machines at once, one with each hand. Through college students boarding with his family he was introduced to more advanced mathematics and began learning on his own. The family name Ramanujan means person who contains a particle of the god Rama. The Company chose a site north of the mouth of the Cooum River where a fishing village called Madraspatnam was located. Ramanujan's mother said that Ramanujan was born after her parents prayed to Namagiri to bless her with a son. To his mother he was a devoted and obedient son, countering her only on rare occasions.


Next

Srinivasa Ramanujan: Latest News, Photos, Videos on Srinivasa Ramanujan

srinivasa ramanujan in hindi

Not all were correct but most were. यह देखकर हैरान रह गये की बालक ने सवाल हल करने में जिस सूत्र का प्रयोग किया है, उसका ज्ञान केवल उच्च कक्षा के विद्यार्थी को ही हो सकता है. In a joint paper with , Ramanujan gave an asymptotic formula for p n. Generally he was not strong in establishing such rigorous proofs. There are other examples of Ramanujan's difficulty at dealing with the elements of ordinary life. However in the examinations at the end of 1907 he again failed due to poor performance in the subjects other than mathematics.

Next